दीपावली एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जो भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। और इसे ‘लाइट्स फेस्टिवल’ भी कहा जाता है, क्योंकि इस मौके पर लोग अपने घरों को दीपों से सजाते हैं। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत, उत्साह, और समृद्धि का प्रतीक है। दीपावली में माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है और लोग एक दूसरे के साथ उपहार विनम्रता से आदान-प्रदान करते हैं।  

दीपावली कब और क्यों मनाया जाता है, इसका इतिहास किया है

दीपावली किया है।

दीपावली हिंदु धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार,जो  हमें उत्साह और आनंद से भर देता है। इस खास मौके पर, घरों को दीपों से सजाकर और माता लक्ष्मी की पूजा करके हम बुराई पर अच्छाई की जीत का खुशी मनाते हैं। दीपावली एक प्रकार से रोशनी का त्योहार है, जो हमारे जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि  को बढ़ावा देता है। दीपावली त्यौहार के पीछे कई पौराणिक कथाएं हैं, लेकिन हम यहां कुछ विशेष कथाएं बता रहे हैं। इस त्यौहार को मनाने का मुख्य कारण नीचे दी गई विशेष पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा होता है।  

भगवान श्री राम का अयोध्या पुनः आगमन 

भगवान श्रीराम को 14 वर्षों के वनवास के बाद रावण का वध हुआ और उन्होंने अयोध्या लौटने का निश्चय किया। इस खास मौके पर अयोध्या वासियों ने घी के दिए जलाकर श्रीराम का स्वागत किया, जिससे दिवाली का आयोजन हुआ।

माता लक्ष्मी का जन्म

हिंदू धर्म और शास्त्रों के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक मास की अमावस्या के दिन माता लक्ष्मी का जन्म हुआ था। इस अद्भुत घटना के उपलक्ष में, दीपावली को माता लक्ष्मी की पूजा के साथ मनाया जाता है।

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भगवान श्री हरि विष्णु का अवतार

समुद्र मंथन में, असुर राज बाली ने माता लक्ष्मी को कैद किया था। इस संग्राम में, भगवान श्री हरि विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और माता लक्ष्मी को मुक्त कराया। इस उदाहरण के लिए, दीपावली के दिन उनकी पूजा भी की जाती है।

जैन धर्म

जैन धर्म के अनुयायियों के लिए दीपावली विशेष है, क्योंकि इस दिन जैन धर्म के संस्थापक ऋषभदेव ने निर्वाण प्राप्त किया था। इसलिए, जैन समुदाय इस दिन को विशेष रूप से मनाता है।

सिख धर्म

दीपावली सिख समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन मुग़ल बादशाह ने सिख गुरु हरगोविंद सिंह जी को कैद किया था, और उनको स्वतंत्रता मिली थी। सिख समुदाय इस मौके पर आनंदित होता है और दीपावली को धूप-दीप से मनाता है।

भगवान श्री कृष्ण

भगवान श्री कृष्ण ने दीपावली के दिन नरकासुर का वध किया था, जो भारतीय मान्यताओं के अनुसार दीपावली के 1 दिन पहले हुआ था।

राजा विक्रमादित्य 

राजा विक्रमादित्य का राज्याभिषेक भी कार्तिक माह की अमावस्या को हुआ था, जो उन्हें आदर्श राजा बनाता है। इस दिन को भी विशेषता से मनाया जाता है।


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पांडवों का अपने राज्य में लौटना

महाभारत के किस्से में है कि पांडवों ने दीपावली के दिन अपने राज्य में लौटकर अपने प्रशंसकों के साथ खुशियाँ मनाईं।

फसलों का त्यौहार

किसानों के लिए दीपावली एक महत्वपूर्ण त्यौहार है, क्योंकि इस समय खरीफ की फसल पूरी तरह से पक जाती है और इसे काटने का समय आता है।

हिंदू नव वर्ष

दीपावली के साथ ही हिंदू व्यापारी लोग अपने नए साल की शुरुआत करते हैं और अपने व्यापार को नए खाते के साथ शुरू करते हैं।

आर्य समाज

आर्य समाज के अनुयायियों के लिए दीपावली का दिन खास है, क्योंकि महर्षि दयानंद जी को निर्वाण प्राप्त हुआ था, जिन्होंने आर्य समाज की स्थापना की थी।

महाकाली का रूप

दीपावली की रात में, माता शक्ति ने महाकाली के रूप में नरकासुर का वध किया, जिससे भक्तों में खुशी और शांति का आभास होता है। इसलिए, दीपावली को भी माता शक्ति की पूजा के साथ मनाया जाता है।   

इस रूप में, दीपावली एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक त्यौहार है जो भगवान श्रीराम के वापसी और माता लक्ष्मी के आविष्कृति के मौके पर मनाया जाता है। 


दीपावली कब और क्यों मनाया जाता है, इसका इतिहास किया है

दीपावली का महत्व

  • दिवाली के दिन माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है, और यह माना जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से इस पूजा को करता है, उसके घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती।

  • दिवाली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जिससे लोग अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की कामना करते हैं।

  • दिवाली का दिन सबको यह याद दिलाता है कि सच्चाई और अच्छाई हमेशा जीतती हैं, चाहे जैसा भी हो।

  • दिवाली के दिन लोग एक दूसरे के साथ उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं और साझा करके एक दूसरे के साथ खुशियाँ बांटते हैं।

  • दीपावली के दिन लोगों के व्यवहार में उत्साह और दया की भावना होती है, जिससे सामाजिक समृद्धि का सूचना मिलता है।

  • मान्यताओं के अनुसार, दिवाली के दिन पटाखे जलाना शुभ होता है और इनकी ध्वनि से खुशी और उत्साह का अभास होता है, जो लोगों को एक साथ जोड़ता है।