सिंधु सभ्यता का इतिहास (History of sindhu Civilization)

सातवीं सदी की बात है। पंजाब के लोग जमीन की खुदाई कर रहे थे। वहाँ उन्हें जमीन के नीचे बनी बनाई ईट मिल गयी। उन लोगों ने ऐसे भगवान का चमत्कार माना और वे लोग उन ईटी का इस्तेमाल अपना घर बनाने मेंकरने लगे।

लेकिन उन लोगों को क्या पता था कि जिन टी का इस्तेमाल वो कर रहे हैं कोई उन्हें अतीत के एक ऐसे दौर में से जाएंगी, जहाँ कभी हजारों साल पहले हम जैसे ही दूसरे लोग एक हाल जिंदगी जीते।

1921 में जब फिर से पंजाब में खुदाई की गई तो जो सामने जाया को भारत की एक बहुत पुरानी सभ्यता के अब तक हमने सिर्फ कहानियों में सुना था कि भारत का इतिहास बहुत पुराना अवशेष थे।लेकिन यह पहली बार था जब हमें इसके सुबूत मिल रहे थे।

इस खोज ने हमें इजिप्ट और मेसोपोटेमिया की प्राचीन सभ्यताओं के साथ ता खड़ा कर दिया। शुरुआत में इस सभाता की जितनी भी बस्तियां खोजी गई थी, वे सभी सिंधु नदी के किनारे पर मिली थी।

इसीलिए इस सिविलाइजेशन को नाम दिया गया सिंधु घाटी की सभ्यता आज से 4500 साल पहले सिंधु घाटी सभ्यता अपने शिखर पर थी उस दौरान इस सभ्यता में करीब पांच मिलियन लोग रहते थे।


सिंधु घाटी सभ्यता की खास बात यह है कि यह पहली अर्बन सिविलाइजेशन थी। पानी पहली बार हमारी दुनिया में शहरों का निर्माण हो रहा था इससे पहले लोग छोटे छोटे गांव में रहते थे। वक्त बीतता गया और फिर छोटे छोटे कस्बे बनाए गए और फिर इन लोगों ने शहरों का निर्माण कर दिया। ऐसे शहर जिन्हें केयरफुल्ली फोन किया गया था।

इन शहरों के मकान पकी हुई ईंटों के बने हुए थे। इन शहरों में कम से कम 30,000 लोग ऐसे थे जो ऐसे घरों में रहते थे जहाँ बाथरूम और टॉयलेट बने हुए ओ।क्या आप इमेजिन कर सकते हैं? आज से 4500 साल पहले इतनी आधुनिक चीजें वजूद में आ गई थी।सिंधु घाटी सभ्यता के जो घर थे, उन घरों के आकार में काफी फा

इससे यह पता चलता है कि जो अमीर लोग थे वो बड़े घरों में रहते थे और समाज के गरीब लोग छोटे घरों में रहते थे। घरों के गंदे पानी को निकालने के लिए लिया बनी हुई थी ये नालियां गली की मैन नाली में जाकर मिलती थी।

इससे आप ये अंदाजा लगा सकते हैं कि उस जमाने के लोगों को भी सफाई वगैरह की अच्छी समझ थी जाहिर सी बात है कि हजारों साल पहले इन लोगों ने अपने आपको काफी विकसित कर लिया था और ये लोग एक बेहतर जिंदगी जीना सीख चुके थे।

सिंधु घाटी सभ्यता के ही सबसे बड़े शहरो में हड़प्पा और मोहनजो दारो इस सभ्यता में जो गांव के लोग होते व पशुपालन और खेती बाड़ी करते थे। और शहर में रहने वाले लोग तो दूसरे देशों के साथ व्यापार तक करते थे।

इन लोगों के समाज में कई तरह के पेशेवर लोग रहते पजैसे सुनार मिट्टी के बर्तन बनाने वाले लकड़ी का काम करने वाले लोग, कारीगर और ईंट बनाने वाले पेशेवर लोगा सिंधु घाटी सभ्यता में खुदाई के दौरान औरतों की मूर्तिया भारी मात्रा में मिली है।

ऐसा हो सकता है कि इन लोगों के समाज में औरतों की दशा काफी अच्छी थी और ये लोग औरतों की काफी इज्जत करते थे। यह माना जाता है कि सिंधु घाटी के लोग काफी धार्मिक थे ये लोग मात्र देवी की पूजा करते थे और मूर्ति पूजा भी करते थे।

लेकिन टेम्पल जैसा कोई बड़ा स्ट्रक्चर खुदाई के दौरान वहाँ से नहीं मिला है। हिस्टोरियन मानते हैं कि लोग मंदिरों में नहीं बल्कि अपने खेतों वगैरह में पूजा करते थे। ये लोग आगे की पूजा और पेट की पूजा करते थे और यह लोग पानी को भी काफी पवित्र मानते थे।

पानी एक तरह से कहा जाए तो ये लोग मूर्ति पूजा के अलावा कुदरती चीजों की पूजा करते थे जैसे आग, पानी, पेड़ पौधे पशु और सूरज आदि सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों की जो जो धार्मिक मान्यताएँ थी, उसका एक बहुत बड़ा हिस्सा तो आज भी हमारे समाज में मौजूद है।

जो जो प्रथाएँ उन लोगों में थी, वहीं आज भी हम में मौजूद है। वैसे तो सिंधु घाटी सभ्यता के दौर को गुजरे 4000 साल से भी ज्यादा का वक्त बीत चुका है। लेकिन तब से लेकर आज तक निरंतरता की एक ऐसी लहर चली आ रही है जो आज भी हमें हमारे उसी

हजारों साल पुराने इतिहास में जोड़ती है। पानी हम भारतवासी आज भी अपने हजारों साल पुराने पाठों जी रहे हैं। और यह हमारे लिए अपने आप में ही बड़ी खुशी की बात है। कुछ 4000 साल पहले ये सभ्यता मिटने लगी थी। ऐसा कैसे हुआ कोई नहीं जानता।

इस महान सभ्यता का अंत कैसे हो गया, इसको लेकर इतिहासकारों की अलग अलग राय है। सिंधु घाटी सभ्यता नदियों के किनारे बनी हुई थी और सिंधु नदी अपनी भयंकर बाढ़ के लिए जानी जाती थी जो शहरों और गाँवों को बहा ले जाती थी। 

सिंधु घाटी सभ्यता नदियों के किनारे बसी हुई थी और सिंधु नदी अपनी भयंकर बाढ़ के लिए जानी जाती थी जो शहरों और गाँवों को बहा ले जाती थी। सो बहुत से हिस्टोरियन्स ये मानते हैं कि बाढ़ से इस सभ्यता का अंत हो गया। लेकिन कुछ कहते हैं कि नहीं, सिर्फ बाढ़ से इतनी विशाल सभ्यता का अंत नहीं हो सकता। इसीलिए वो और भी बातें कहते हैं।

वे कहते हैं कि इन शहरों में कोई बड़ी महामारी फैली होगी, जिससे शहरों की आबादी खत्म हो गयी ।यह भी माना जाता है कि यहाँ शायद भारी जलवायु परिवर्तन हुआ होगा। जमीन सूखती गई और खेतों में रेगिस्तान छा गया होगा और इसीलिए यहाँ लोगों का रहना दुश्वार हो गया होगा। कुछ मानते हैं की यहाँ विदेशी लोगों का हमला हुआ था।

लेकिन ज्यादातर इतिहासकार इस बात से इनकार करते हैं। क्योंकि खुदाई के दौरान हथियार वगैरह कुछ ज्यादा नहीं मिले हैं। इतिहासकार मानते हैं कि यह सभ्यता अपने अंतिम दौर में बड़ी खुशहाल थी। यूतो फिर ऐसे में कैसे ये सभ्यता खत्म हो गयी? कुछ लोग तो यहाँ तक कहते हैं कि इस सभ्यता का अंत अचानक किसी ऐसी घटना से हो गया जिसकी

इतिहास में कोई व्याख्या नहीं मिलती।

ऐसा लगता है कि मानो ये सभ्यता किसी एक वजह से खत्म नहीं हुई होगी।

पहले सिंधु नदी में बाढ़ आई होगी, जिससे बड़ी तादाद में लोग मर गए।

खाने पीने के सामान की भारी कमी हो गई। लाशों के सड़ने से कोई?